मैं, बबलू लाल सिंह, वर्ष 2004 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय से B.A. करने के पश्चात दिल्ली पढ़ने आया। यहाँ रहकर मैंने M.A. एवं B.Ed. की शिक्षा प्राप्त की और प्रतियोगी परीक्षाओं (Civil Services) की तैयारी करने लगा।
अगस्त 2012 में मैं शिवाजी स्टेडियम (कनॉट प्लेस) पर बस के इंतज़ार में खड़ा था। वहीं पास में एक कूड़ेदान था। तभी मैंने देखा कि एक बुज़ुर्ग भिखारी उस कूड़ेदान से भोजन उठाकर खा रहे थे। यह दृश्य देखकर मेरे हृदय में अत्यंत पीड़ा हुई। मुझे लगा कि ऐसे असहाय और बेसहारा लोगों के लिए कुछ करना चाहिए।
कुछ देर बाद बस आई और मैं घर लौट आया, लेकिन मेरे मन में वही दृश्य बार-बार आता रहा। बहुत सोचने के बाद मेरे मन में विचार आया कि यदि I.A.S. बनकर भी समाज सेवा करनी है, तो क्यों न इसी रास्ते समाज सेवा की जाए। तभी मैंने यह निर्णय लिया कि मैं असहाय, वृद्ध एवं भिखारी बच्चों के लिए कार्य करूँगा।
मैंने सबसे पहले एक बच्चे को आर.के.पुरम में पढ़ाना शुरू किया। आज वह बालिका दिल्ली विश्वविद्यालय से B.A. कर रही है। इस कार्य को करते-करते मैं अपने कुछ मित्रों और वरिष्ठों से चर्चा करता रहा। चर्चा के दौरान कुछ वरिष्ठों ने सुझाव दिया कि ऐसे कार्य को लंबे समय तक करने के लिए एक व्यवस्थित संस्था की आवश्यकता होगी, जो NGO के माध्यम से संभव है। काफी विचार-विमर्श के पश्चात अक्टूबर 2014 में मैंने अखिल भारतीय स्तर पर “पुनर्जागरण समिति” नामक एक NGO पंजीकृत कराया, जिसमें वर्तमान में 9 सदस्य हैं।
आज हम देश के 6 राज्यों — दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और उत्तराखंड — में कार्य कर रहे हैं।
पुनर्जागरण समिति द्वारा कुल 71 केंद्र संचालित किए जा रहे हैं, जिनमें:
इन सभी केंद्रों के माध्यम से अब तक 6410 प्रशिक्षु एवं विद्यार्थी लाभान्वित हो चुके हैं।